-हिन्दू युवतियों को धर्म बदलने के लिए किया जा रहा मजबूर
-धर्म नहीं बदलने पर नौकरी से निकालने और करियर बर्बाद करने का कुचक्र
-पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो पीड़िताओं ने मुख्यमंत्री से की शिकायत,
सूर्या बुलेटिन
गाजियाबाद। गाजियाबाद में बड़े स्तर पर इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दुओं के धर्मांतरण के मामले सामने रहे थे, लेकिन अब एक ईसाई मिशनरी का भी कारनामा सामने आया है। मसूरी के होली क्रॉस अस्पताल में कार्यरत दो युवतियों ने अस्पताल प्रबंधन की ओर से उन पर धर्मांतरण का दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए हैं। युवतियों ने थाना स्तर से लेकर मुख्यमंत्री तक से शिकायत की हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। युवतियों का आरोप है कि धर्म नहीं बदलने पर अस्पताल में उनका उत्पीड़न किया जा रहा है और जबरन नौकरी से निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
मसूरी के होली क्रॉस अस्पताल में पिछले दस साल से कार्यरत पीड़ित हिन्दू युवती ने बताया कि दस साल में उनका वेतन तक नहीं बढ़ा गया है। वह जब भी प्रबंधन से इस बारे में बात करती हैं थीं तो शुरू में उनसे ईशारों में धर्म बदलने के लिए कहा जाता था, लेकिन हालात धीरे-धीरे बिगड़ते चले गए। अस्पताल की प्रबंधक उदया, सिस्टर मैरी क्लेयर और सिस्टर रानी उन पर सीधे तौर पर धर्म बदलकर ईसाई बनने का दबाव बनाने लगीं। जब उन्होंने इस बात से इनकार किया तो उन्हें नौकरी से निकालने और करियर बर्बाद करने की धमकी दी जाने लगी। यहां तक उनका साथ देने वाली ईसाई युवती पर भी कई तरह की पाबंदियां लगा दी गईं। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने दूसरी हिन्दू युवती से जबरन टॉयलेट तक साफ करवाया। पीड़ित हिन्दू युवती का आरोप है कि जब उन्होंने उत्पीड़न का विरोध किया तो उन्हें नौकरी से निकालने के लिए नोटिस रिसीव करने के लिए कार्यालय में बुलाया गया। उन्हें नोटिस को बिना पढ़े रिसीव करके साइन करने के लिए कहा गया और पढ़े बिना साइन करने से इनकार करने पर सिस्टर विनिता और मिस ऐजेला ने बतौर गवाह नोटिस पर यह लिखा कि उन्होंने नोटिस रिसीव करने से इनकार कर दिया और उस पर साइन भी कर दिए। पीड़ित हिन्दू युवती का कहना है कि यह प्रबंधन की सोची समझी साजिश थी, जिससे उन्हें एकतरफा नौकरी से निकाला जा सके। ऐसा ही व्यवहार दूसरी हिन्दू महिला कर्मचारी के साथ भी किया जा रहा है। पीड़िता ने बताया कि अस्पताल में अधिकांश स्टाफ ईसाई है और जो ईसाई नहीं हैं, उन पर धर्म बदलने का दबाव बनाया जाता है। कई लोग तो दबाव में धर्म बदल भी चुके हैं, जिन्हें यहां से स्थानांतरित कर दिया गया। जिससे किसी और को उनके धर्म बदलने के बारे में जानकारी न हो सके। पीड़ित हिन्दू युवती ने बताया कि वेतन विसंगतियों और बढ़ोत्तरी नही होने व उत्पीड़न को लेकर उन्होंने कई बार अस्पताल से उच्च प्रबंधन से भी शिकायत की, लेकिन हर बार उनकी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया गया। पूर्व में प्रबंधन में शामिल जिन अधिकारियों ने उनका बचाव करने का प्रयास किया, उनका भी यहां से तबादला कर दिया गया। पीड़ित हिन्दू युवतियों का आरोप है कि अस्पताल में मिशनरी द्वारा धर्मांतरण का घिनौना खेल चल रहा है। लोगों को नौकरी, रुपया और करियर का लालच देकर धर्मांतरण करवाया जाता है और जो इससे इनकार करता है पहले उसका उत्पीड़न किया जाता है और फिर उसे कोई आरोप लगाकर नौकरी से निकाल दिया जाता है। अस्पताल के उच्च प्रबंधन ने जब युवतियों की शिकायतों को नजरअंदाज किया तो उन्होंने सात जुलाई को उन्होंने पुलिस, प्रशासन और मुख्यमंत्री से शिकायत की। यहां तक उन्होंने जनसुनवाई में पहुंचकर भी शिकायत की। लेकिन, पुलिस और प्रशासन के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित हिन्दू युवतियों ने बताया कि पुलिस ने कई बार अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करके थाने या एसीपी कार्यालय पहुंचकर सफाई देने के निर्दश भी दिए, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई भी सफाई देने नहीं पहुंचा। यहां तक कि पुलिस ने उन्हें भी बयान देने के लिए थाने या एसीपी कार्यालय नहीं बुलाया। जबकि एसीपी मसूरी बिना उनके बयान लिए अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए अस्पताल पहुंच गए और मैनेजर उदया से मिलकर, बातचीत करके भी आए, लेकिन उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। पीड़ित हिन्दू युवतियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुकदमा दर्ज करके अस्पताल की आड़ में चल रहे धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश करने की मांग की है। इस मामले में सहायक पुलिस आयुक्त मसूरी अजय सिंह ने बताया कि शिकायत मिली है, मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके अनुसार कार्रवाई की जएगी।