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Saturday, Sep 19, 2026
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गाज़ियाबादअपराध

कांवड़ लेकर लौट रहे चार दोस्त डीएमई पर ट्रक से टकराए, दो किशोरों की मौत

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-एक युवक गंभीर घायल और दूसरा युवक चोटिल
-डीएमई पर खराब हालत में सड़क किनारे खड़ा था ट्रक
-दो बाइकों पर चार दोस्त थे सवार
सूर्या बुलेटिन
गाजियाबाद। कौशांबी थाना क्षेत्र में डीएमई पर यूपी गेट के पास बुधवार सुबह लगभग छह बजे सड़क पर खराब ट्रक से दो बाइक टकरा गईं। दोनों बाइक पर सवार युवक और किशोर हरिद्वार से कांवड़ लेकर गुरुग्राम जा रहे थे। हादसे में एक बाइक पर सवार दो किशोरों की मौत हो गई। जबकि दूसरी बाइक पर सवार एक युवक गंभीर रूप से घायल और दूसरा चोटिल हो गया। हादसे के बाद घायल डीएमईसे गुजरते वाहनों को सहायता के लिए रोकने का प्रयास करते रहे, लेकिन किसी ने उनकी सहायता नहीं की। बाद में राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल दो किशोरों को मृत घोषित कर दिया गया। घायल युवक को अस्पताल में भर्ती किया गया है और चोटिल का प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में ले लिया है। 
गुरुग्राम के सेक्टर-20 में हनुमान मंदिर के पास रहने वाले 18 वर्षीय सौरव ने बताया कि वह अपने दोस्त 18 वर्षीय आकाश पुत्र मनोज मूल निवासी रकसोल मोतिहारी बिहार, 17 वर्षीय प्रिंस पुत्र आमोद कुमार मूल निवासी बेतिया, गोपालपुर बिहार और 16 वर्षीय कृष्णा पुत्र सूरज मूल निवासी पालसा, नेपाल के साथ हरिद्वार कांवड़ लेने गए थे। हरिद्वार से कांवड़ लेकर वह गुरुग्राम लौट रहे थे। एक बाइक प्रिंस चला रहा था और दूसरी बाइक आकाश चला रहा था। बुधवार सुबह दोनों बाइक डीएमई पर यूपी गेट के पास पहुंची थी। इस दौरान सड़क किनारे एक खराब ट्रक खड़ा था, जिसका उन्हें आभास नहीं हो सका। प्रिंस की बाइक आगे थी, उसकी बाइक ट्रक से टकरा गई और प्रिंस व कृष्णा गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी बाइक को ट्रक से टकराते देख आकाश ने भी तेजी से ब्रेक लगाए, जिससे उनकी बाइक फिसलती हुई प्रिंस की बाइक से जा टकराई। इससे आकाश के सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोट आई, जबक सौरव के पैर में हल्की चोटों आईं। हादसे के बात उनके तीनों दोस्त बुरी तरह से लहूलुहान हो गए थे प्रिंस का सिर बुरी तरह से फट गया था और कृष्णा के सिर में भी गंभीर चोट आई थी। दोनों लहूलुहान हालत में सड़क पर पड़े थे। सौरव ने बताया कि उन्होंने और आकाश ने डीएमई पर सहायता के लिए वाहनों को हाथ देकर रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसी ने वाहन नहीं रोका। फिर उन्होंने 112 पर फोन कर हादसे की सूचना दी। सूचना पर पुहंची पुलिस ने एंबुलेंस को बुलाया। मौके पर दो एंबुलेंस आई थीं। पहली एंबुलेंस प्रिंस और कृष्णा को पास के निजी अस्पताल ले गई जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। दूसरी एंबुलेंस आकाश और उन्हें एमएमजी अस्पताल ले गई। जहां आकाश का इलाज चल रहा है और उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। सहायक पुलिस आयुक्त इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य ने बताया कि किशोरों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। ट्रक को कब्जे में ले लिया गया है। शुरूआती जांच में पता चला कि ट्रक खराब हो गया था, जिसके कारण वह सड़क किनारे खड़ा था। चालक ने सहायता के लिए मिस्त्री को बुलाया था। हादसे के समय ट्रक पर चालक और परिचालक दोनों ही नहीं थे।
--हेलमेट लगाया होता तो बच सकती थी जान
गुरुग्राम से हरिद्वार जाने और फिर वापस आने का सफर लगभग 490 किलोमीटर का है। रास्ते में कई हाई-वे भी हैं। इतने लंबे सफर के लिए परिजनों ने चारों से हेलमेट लगाने के लिए भी कहा था। लेकिन, चारों ने परिजनों की बात नहीं मानी और बिना हेलमेट ही बाइक से सफर पर निकल पड़े थे। पोस्टमार्टम हाऊस पर बैटे प्रिंस के बड़े भाई अरविंद ने बताया कि यदि उन्होंने हेलमेट लगा लिया होता तो शायद हादसे में किसी की जान नहीं जाती। प्रिंस का सिर और चेहरा ट्रक से टकराने के कारण बुरी तरह से फट गया था और पहचान में भी नहीं आ रहा था। कृष्णा के सिर भी फट गया था। आकाश को भी सिर में गंभीर चोट आई है और चिकित्सक ने उन्हें बैठने से भी मना किया है।
--सहायता के लिए पुकारते रहे
सौरव ने बताया कि हादसे के बाद वह सड़क पर दौड़ते हुए वाहनों को सहायता के लिए रोकने का प्रयास करने लगे थे। काफी देर तक भी किसी ने वाहन नहीं रोका था। इस दौरान आकाश भी किसी तरह से खड़े होकर सहायता के लिए वाहनों को रोकने का प्रयास किया। किसी भी वाहन चालक ने सड़क पर लहूलुहान पड़े लोगों को देखकर भी वाहन नहीं रोका। उन्होंने एंबुलेंस की सहायता के लिए 108 डायल किया, लेकिन नंबर नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने डायल-112 पर फोन किया। कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंच गई। इसके बाद पुलिस ने एंबुलेंस बुलाई। सौरव ने बताया कि जब एंबुलेंस आई तब प्रिंस के शरीर में कोई हलचल नहीं थी लेकिन, कृष्णा की सांसे चल रही थीं। यदि एंबुलेंस कुछ देर पहले आ जाती तो शायद उसकी जान बच जाती।

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