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Thursday, Jun 18, 2026
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कनावनी गांव के बाहर बनी झुग्गियों में लगी आग, 150 से ज्यादा झुग्गियां जलकर राख

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-अवैध रूप से बसाई गई झुग्गियां, बांग्लादेशी घुसपैठियों को भी झुग्गियों में दी पनाह
-झुग्गियों में बांग्लादेशी घुसपैठिए बड़ी संख्या में रह रहे हैं
-पुलिस जांच करे तो हो सकता है बड़ा खुलासा
सूर्या बुलेटिन
गाजियाबा। इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के कनावनी में पुलिस, प्रशासन और आवास विकास की लापरवाही के चलते बसी झुग्गियों में 16 अप्रैल की दोपहर अचानक आग लग गई। आग में 150 से ज्यादा झुग्गियां जलकर राख हो गईं और 12 से ज्यादा कबाड़ के गोदाम जल गए। इस दौरान झुग्गियों में रखे 50 से ज्यादा छोटे-बड़े गैस सिलेंडर भी फट गए। जिससे आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। सूचना पर पहुंची दमकल की लगभग 22 गाड़ियों ने चार घंटे में आग पर काबू पाया। हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई लेकिन, लोगों का लाखों रुपये कीमत का सामान जलकर राख हो गया। वहीं पास में एक शेल्टर होम में सात कुत्तों की जलकर मौत हो गई। दमकल विभाग की सूझबूझ की वजह से आसपास की करीब 1200 झुग्गी व पास के मकानों को जलने से बचा लिया गया। मौके पर पहुंचे जिलाधिकारी, पुलिस उपायुक्त शहर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी समेत पुलिस-प्रशासन व अन्य विभागों के अधिकारियों ने घटनास्थल की जायजा लिया। उधर, सूत्र बताते हैं कि इन झुग्गियों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों ने पनाह ले रखी है, लेकिन पुलिस की लापरवाही के कारण उनका खुलासा नहीं हो सका है। 
कनावनी गांव के बाहर आवास विकास का कई एकड़ का एक खाली प्लाट है। इस प्लाट पर पिछले कुछ वर्षों में अवैध रूप से हजारों झुग्गियां बस गईं। आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने भी अवैध रूप से बस रहीं झुग्गियों को नहीं रोका। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी सोते ही रहे। सूत्र बताते हैं कि इन झुग्गियों में हजारों की संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों ने अपना ठिकाना बना रखा है। इसके अलावा झुग्गियों में झारखंड, बिहार, वेस्ट बंगाल के भी लोग रह रहे हैं। अवैध घुसपैठियों ने प्लाट पर 30 से ज्यादा कबाड़ के गोदाम बना रखे हैं। गुरुवार की दोपहर लगभग 12 बजे प्लाट के बीच में बसी झुग्गियों में अचानक आग लग गई। जिसके बाद भगदड़ मच गई। हवा के रुख की ओर से आग तेजी से फैलती चली गई और लोगों को झुग्गियों से सामान निकालने का भी मौका नहीं मिला। झुग्गियों में रहने वालों ने अपने बच्चों के साथ प्लाट के बाहर की ओर भागकर जान बचाई। इस दौरान कुछ बच्चे अभिभावकों से बिछड़ भी गए। देखते ही देखते आग ने पास के कबाड़ गोदाम को भी चपेट में ले लिया। जिसके बाद आग और ज्यादा तेजी से फैलने लगी। झुग्गियों में रखे छोटे-बड़े गैस सिलेंडर धमाकों के साथ फटने लगे, जिससे वहां दहशत का माहौल बन गया। झुग्गियों से सटे कनावनी गांव में भी लोग घरों से बाहर निकल कर भागने लगे। लगभग सवा 12 बजे दमकल विभाग को घटना की सूचना दी गई। जिसके बाद दमकल विभाग ने चार गाड़ियों को मौके पर भेजा। आग की विकरालता को देखते हुए गाजियाबाद के सभी फायर स्टेशनों समेत गौतमबुद्धनगर, टाटा स्टील व अन्य जगह से करीब 22 दमकल की गाड़ियां बुलाकर चारों तरफ से आग को बुझाने का काम शुरू किया गया। लगभग दो बजे आग पर काबू गया, लेकिन आग फिर से धधक उठी। दमकल की गाड़ियों ने कई चक्कर लगाए और लगातार आग पर पानी बरसाया। तब जाकर लगभग चार घंटे बाद शाम चार बजे आग पर काबू पाया जा सका। हादसे में जनहानि से पुलिस और दमकल अधिकारी इनकार कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार खुला इलाका होने के चलते लोग भाग निकले। जिससे कोई झुलसा भी नहीं है। हालांकि आग से 150 से ज्यादा झुग्गियां, कबाड़ के 12 गोदाम, 20 से ज्यादा ई-रिक्शा और अन्य सामान जलकर राख हो गया।
-आग में जलकर सात कुत्तों की मौत
प्लाट से सटे कनावनी गांव में फैली फाउंडनेशन के नाम से कुत्तों का शेल्टर होम बना था। यहां 70 से ज्यादा बीमार और आवारा कुत्ते रहे थे। आग शेल्टर होम तक पहुंच गई। आग में झुलकर सात कुत्तों की मौत हो गई, जबकि अन्य को दमकल और पुलिस टीमों ने बाहर निकला लिया।
-चूल्हे और शॉर्ट सर्किट से आग की आशंका
मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि आग घरेलू चूल्हे या शॉर्ट सर्किट से लगने की आशंका है। आग के कारणों की जांच की जा रही है। घटना में करीब 150 झुग्गियां जलकर राख हो गई। सर्च आपरेशन में किसी प्रकार की जनहानि या किसी के घायल होने की जानकारी नहीं मिली है। आग को पूरी तरह से बुझा दिया गया है। क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण देर रात तक कूलिंग का काम किया गया। सही झुग्गियों की संख्या पता लगाने के लिए भी जांच की जा रही है।
--झुग्गी में रखे 50 हजार रुपये आग में जले
तेजी से फैली आग के चलते बहुत से लोगों को झुग्गी में रखा सामान भी निकालने का मौका नहीं मिला। कई लोगों ने नकदी जलने का भी दावा किया है। झुग्गी में रहने वाली युवती मुस्तरी खातून का कहना है कि उनकी मां काम पर गई थी जबकि वह पिता और छोटे-भाई बहन घर पर थे। भाई-बहन के स्कूल में एडमिशन के लिए 50 हजार रुपये रखे हुए थे जो जल गए। तेजी से फैली आग में उन्हें रुपये निकालने का मौका नहीं मिला। उनके अलावा आकाश ने बताया कि वह केवल कुछ ही सामान ले सके थे, बाकी सामान जल गया। सानिया भी झुग्गी से कोई सामान नहीं निकाल सकीं।
--नगर निगम के टैंकरों व बारात घर के अग्निशमन संयंत्र से मिली मदद
विकराल आग को बुझाने के लिए दमकल विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। देर रात दमकल की गाड़ियां फेरे लगाकर पानी लाती रहीं। इसके अलावा नगर पलिका व नगर निगम के पानी के टैंकर भेजेे गए, जिनसे आग पर छिड़काव कराया गया। इसके साथ ही पास में बारात घर व स्कूल के अग्निशमन संयंत्र से भी दमकल विभाग को आग बुझाने में मदद मिली। पानी के टैंकर भरने के लिए पास में लगाए गए सबमर्सिबल की भी दमकल विभाग को मदद मिली। गाड़ी खाली होने के बाद यहां से भरकर आग पर पानी डाला गया। इसके साथ ही स्थानीय लोगों व सिविल डिफेंस के वार्डनों की मदद भी पुलिस व दमकल विभाग को मिली। वहीं, एहतियात के तौर पर मौके पर 34 एंबुलेंस भी भेजी गई थीं।
--बड़ा सवालः कैसे बस गई हजारों की संख्या में अवैध झुग्गियां
जिस स्थान पर यह हादसा हुआ है, वह प्लाट आवास विकास परिषद का बताया जाता है। यह प्लाट कई साल से खाली पड़ा है। सूत्र बताते हैं कि इस प्लाट के लिए मुआवजा भी दिया जा चुका है। आसपास में रहने वाले कुछ दबंग किस्म के लोगों ने यहां कबाड़ के गोदाम बनाए थे। जिसके बाद झुग्गियां बसाने की शुरुआत कर थी। धीरे-धीरे प्लाट पर हजारों झुग्गी बसा दी गईं। इन झुग्गियों में बांग्लादेशी घुसपैठियों को भी पनाह दी गई गई है। प्रत्येक झुग्गी से 1200 रुपये महीना किराया भी लिया जाता है। अवैध रूप से बसी इन झुग्गियों में बिजली के कनेक्शन भी हैं। पुलिस यदि इन झुग्गियों में रहने वालों की जांच करे तो हजारों की संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिया मिलेंगे। 
 

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