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Thursday, Jun 18, 2026
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गाज़ियाबादस्वास्थ्य

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जिले में पनप रहे झोलाछाप

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-लाल कुआं की राज कंपाउंड कॉलोनी में खुला झोलाछाप का नर्सिंग होम
-भ्रूण लिंग जांच के आरोप में जेल जाने वाले ने खोला क्लीनिक
-क्लीनिक पर दिन भर में पहुंचते हैं 100 से ज्यादा मरीज
-स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे हो रहा लोगों की जान से खिलवाड़
सूर्या बुलेटिन
गाजियाबाद। जिले में आए दिन लोग झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज का शिकार होकर जान गंवा रहे हैं। शासन भी झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्ती बरतने और उनके क्लीनिक सील करने के निर्देश देता है, लेकिन शासन के निर्देश स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में दबे रहते हैं। झोलाछाप के गलत इलाज से किसी की मौत होने पर ही वह फाइल खुलती है और कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। जिसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है वही कुछ ही दिनों बाद जगह और नाम बदलकर फिर से लोगों की जान से खिलवाड़ करने के लिए नया क्लीनिक खोल लेता है। जिसके बाद एक बार फिर से जिंदगी और मौत की जंग शुरू हो जाती है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे और कान बंद किए बैठा रहता है। ऐसा ही मामला अब वेव सिटी थाना क्षेत्र की लाल कुआं पुलिस चौकी क्षेत्र में राज कंपाउंड कॉलोनी में सामने आया है। 
स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही के चलते राज कंपाउंड कॉलोनी में अवैध नर्सिंग होम के जरिए लोगों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। भारद्वाज क्लीनिक के नाम से चल रहे नर्सिंग होम में दो बेड की व्यवस्था है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्लीनिक में भ्रूण लिंग जांच और अवैध गर्भपात करवाए जाते हैं। क्लीनिक का संचालक वर्ष 2024 में भ्रूण लिंग जांच के मामले में जेल भी जा चुका है। क्लीनिक को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी शिकायत की गई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इस अवैध क्लीनिक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। राज कंपाउंड में रहने वाले लोगों ने बताया कि कॉलोनी में यह क्लीनिक कुछ ही समय पहले खुला है। इस क्लीनिक को नाजिम नाम के व्यक्ति ने खोला है और यहां आदिल नामक व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताते हुए मरीजों का इलाज करता है। जबकि आदिल के पास मेडिकल संबंधी कोई डिग्री या अन्य संबंधित प्रमाण पत्र नहीं है। क्लीनिक पर डॉ. बबीता का नाम भी दर्ज है, लेकिन उन्हें क्लीनिक पर कभी नहीं देखा गया। क्लीनिक में दो बेड भी हैं, जिन पर मरीजों को भर्ती किया जा सकता है। इस पर जब सूर्या बुलेटिन की टीम ने क्लीनिक का दौरा किया तो लोगों की बातों में सच्चाई पाई गई। आदिल अपना कोई भी शैक्षणिक प्रमाण पत्र नहीं दिखा सका और नाजिम से भी संपर्क नहीं करवाया। उसने कहा कि आज डॉक्टर साहब नहीं आए हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस क्लीनिक पर इलाज के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ होता है। झोलाछाप डॉक्टरों के दवा देने से कभी भी किसी मरीज की जान जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग इस ओर से पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। विभागीय अधिकारी झोलाछाप क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करके लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि झोलाछाप डॉक्टरों की ओर से क्लीनिक चलाने के नाम पर स्वास्थ्य विभाग को भी मोटी रकम पहुंचाई जाती है। 
--ऐसे होता है खेल
सूत्र बताते हैं कि झोलाछाप क्लीनिक की शिकायत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंचती है और नोटिस जारी करके 7 से 15 दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेज विभाग में जमा करने की चेतावनी देती है। इसके बाद झोलाछाप विभाग में पहुंचता है और अधिकारियों से मनुहार करता है। मोटा 'जुर्माना' वसूला जाता है और क्लीनिक को बंद करके दूसरी जगह खोलने के निर्देश दिए जाते हैं। कई बार तो मोटा 'जुर्माना' वसूलने के बाद महज दिखाने के लिए क्लीनिक पर सील लगा दी जाती है। ज्यादा दबाव होने पर मुकदमा भी दर्ज करवा दिया जाता है, लेकिन ऐसे मामलों में कभी झोलाछाप की गिरफ्तारी नहीं होती। कई बार तो स्वास्थ्य विभाग की टीम नोटिस दिए बिना ही 'जुर्माना'  वसूल लेती है और अवैध क्लीनिक चलता रहता है, लोगों की जान से खिलवाड़ करता रहता है। 
--विभाग के अधिकारी लेना चाहते हैं झोलाछाप का चार्ज
स्वास्थ्य विभाग में तैनात अधिकारी झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई कि जिम्मेदारी लेना चाहते हैं। इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भी मनाया जाता है। इसमें एक बड़ा झोल है। झोल यह है कि आयुर्वेद, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा समेत कई विधाओं में शैक्षणिक योग्यता रखने वाले लोग क्लीनिक खोल सकते हैं। झोलाछाप इनमें से किसी के प्रपत्रों का प्रयोग करते हैं। जबकि जिसके प्रपत्रों पर अनुमति ली जाती है, वह कभी वहां नहीं जाता और क्लीनिक झोलाछाप ही संभालते हैं। ऐसे मामलों में जांच के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मोटा जुर्माना वसूलती है और क्लीनिक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती। जबकि जनसामान्य की जान से खिलवाड़ के आरोप में दोनों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हालात ऐसे हैं कि एक डॉक्टर के पास कंपाउंडर की नौकरी करने वाला भी पांच-सात साल नौकरी करने के बाद अपना क्लीनिक खोल लेता है। गांव, देहात और ऐसे दुर्गम क्षेत्र जहां सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं, वहां झोलाछाप क्लीनिक चलाएं और स्वास्थ्य विभाग को जानकारी नहीं हो, माना जा सकता है। लेकिन, गाजियाबाद जैसे हाईटेक शहर में जहां हर गांव, गली तक स्वास्थ्य विभाग की पहुंच है वहां झोलाछाप खुलेआम क्लीनिक चला रहे हैं, बेहद गंभीर बात है। यह न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि शासन में बैठे अधिकारियों की कार्य कुशलता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है। 
--कहीं स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से ही नहीं पनप रहे झोलाछाप
गाजियाबाद में स्वास्थ्य विभाग की लंबी चौड़ी टीम है। तीस हजार से ज्यादा लोग स्वास्थ्य विभाग में काम करते हैं। सीएचसी, पीएचसी, आय़ुष्मान केंद्र, एएनएम, मलेरिया विभाग के कर्मचारी और इनके अलावा आशा व आंगनबाड़ी भी स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में रहती हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को झोलाछाप के क्लीनिकों की जानकारी नहीं होती। यह बात तो किसी भी स्थिति में मानी नहीं जा सकती है। एक फिल्म का डायलॉग है कि यदि पुलिस चाह ले तो मंदिर के बाहर से चप्पल तक चोरी न हो। वैसा ही कुछ स्वास्थ्य विभाग के साथ भी है। यदि मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी और सभी एसीएमओ चाह लें तो झोलाछाप जिले में पनप ही नहीं सकते। साफ है, झोलाछाप को किसी न किसी रूप में स्वास्थ्य विभाग की सहमति प्राप्त है। 
--कौन है नर्सिंग होम संचालक नाजिम
गुरुग्राम और गाजियाबाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो दिसंबर 2024 को संयुक्त कार्रवाई करते हुए पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के साथ एक व्यक्ति और महिला दलाल को गिरफ्तार किया था। दोनों भ्रूण लिंग परीक्षण गिरोह के सदस्य थे। गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग की टीम इस गिरोह के पीछे कई दिनों से लगी हुई थी। टीम ने फर्जी ग्राहक तैयार की। महिला दलाल ने ग्राहक को मानसरोवर पार्क गली नंबर तीन लाल कुआं स्थित शिवा हॉस्पिटल में बुलाया। तय समय पर गाजियाबाद और गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शाम करीब छह बजे अटैची में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन लेकर आने वाले नाजिम और दलाल ममता को अस्पताल के कमरे से गिरफ्तार कर लिया। गाजियाबाद के नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग संजोग ने बताया था कि अल्ट्रासाउंड करने वाले नाजिम ने पूछताछ में बताया कि वह कोई डिग्रीधारक नहीं है। उसने सिर्फ दसवीं तक पढ़ाई की है। दलाल ममता और नाजिम के अलावा शिवा हॉस्पिटल की मालिक सोनी के खिलाफ भी वेव सिटी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। हालांकि सोनी एक साल बाद भी गिरफ्तार नहीं हो सका है। 
 

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