-हिन्दू छात्र की हत्या के बाद नींद से जागा गाजियाबाद का पुलिस-पुलिस प्रशासन
-गाजियाबाद में सूर्या हत्याकांड के बाद पुलिस-प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
-अब पूरे प्रदेश में तलाशे जा रहे अवैध मदरसे और मस्जिद, की जा रही बुलडोजर कार्रवाई
सूर्या बुलेटिन
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में माहौल बदलना शुरू हो गया है। इस्लामिक कट्टरवाद के मूल माने जाने वाले मदरसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसकी शुरुआत गाजियाबाद के खोड़ा में हुए सूर्या हत्याकांड के बाद हुई है। 11वीं के छात्र सूर्या की उसके ही इस्लामिक कट्टरपंथी दोस्त ने चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। इस हत्या से उठा शोर सत्ता के गलियारों तक पहुंचा। जिसके बाद कड़ी और कभी न भूलने वाली कार्रवाई के आदेश दिए गए। इसके बाद पूरा प्रशासनिक अमला कड़ी कार्रवाई में जुट गया। 72 घंटों के भीतर सूर्या के हत्यारे को पुलिस मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया और उसके पिता समेत चार लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। सूर्या हत्याकांड के बाद प्रदेश भर में मस्जिद और मदरसों के खिलाफ अभियान शुरू हो गया है। गाजियाबाद में एक मदरसा, मस्जिद में बनी अवैध दुकानों को ध्वस्त करने साथ ही चार मदरसों पर सील लगाई गई है। इसके साथ ही पूरे जिले में अवैध और बिना अनुमति के चल रहे मदरसों का चिह्नीकरण शुरू कर दिया गया है। यह केवल गाजियाबाद में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में हो रहा है। पुलिस भी वही है, प्रशासन भी वही है और अवैध मदरसे भी वही हैं। शासन के कड़े निर्देशों के बाद भी पुलिस और प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा था। क्या पुलिस और प्रशासन को हिंदुओं की हत्याओं का इंतजार था। या फिर पुलिस और प्रशासन इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हिंदुओं के नरसंहार का इंतजार कर रहा था। सूर्या हत्याकांड के बाद जो कार्रवाई हो रही है, वह पहले भी हो सकती थी। शायद, पहले इतनी कड़ी कार्रवाई होती तो आज सूर्या जिंदा होता।
--मोदीनगर में मस्जिद के गेट और 14 अवैध दुकानें ध्वस्त
गाजियाबाद के मोदीनगर के बेगमाबाद में जामा मस्जिद से सटी सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बने मस्जिद के गेट व 14 दुकानों का प्रशासन ने सोमवार को ध्वस्तीकरण कर दिया। प्रशासन ने नोटिस जारी कर दो दिन के भीतर दुकान खाली करने के आदेश दिए थे। सात जून को ही लोगों ने दुकान खाली कर ली थी। आठ जून सोमवार दोपहर चार जेसीबी बुलडोजर की मदद से प्रशासन ने अवैध कब्जा ध्वस्त कर सरकारी जमीन को अपने कब्जे में लिया। हंगामे की आशंका को देखते हुए 500 से अधिक पुलिसकर्मी मौके पर तैनात किए गए। एसडीएम कोर्ट से 18 मई काे ही नगर पालिका के पक्ष में फैसला दिया गया था। अब प्रशासन जुर्माने की 2.22 करोड़ वसूलने की कार्रवाई शुरू करेगा।
मोदीनगर के बेगमाबाद गांव में जामा मस्जिद है, जिसे बड़ी मस्जिद भी कहा जाता है। मस्जिद में प्रवेश द्वारा से सटाकर एक कांप्लेक्स बनी हुई थी, जिसमें 14 दुकानें व एक गोदाम था। 2020 में मोदीनगर नगर पालिका की तरफ से इस जमीन पर अपना स्वामित्व बताते हुए कब्जे के लिए एसडीएम कोर्ट में पीपी एक्ट में वाद दायर किया। 30 नवंबर 2023 को एसडीएम कोर्ट से नगर पालिका मोदीनगर के पक्ष में फैसला सुनाया गया। लेकिन उस समय कब्जा नहीं लिया गया। इसी का फायदा उठाकर 28 अप्रैल 2025 को मस्जिद समिति की तरफ से आरिफ ने शिकायती पत्र दाखिल किया। इस पर फिर से सुनवाई हुई। लेकिन मस्जिद प्रबंधन समिति अपने पक्ष में कोई मजबूत साक्ष्य नहीं दे पाई। सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन नगर पालिका में आई। एसडीएम कोर्ट से 18 मई 2026 को फिर से मोदीनगर नगर पालिका के पक्ष में फैसला देकर यहां हुए निर्माण को अवैध घोषित कर दिया। ये दुकानें यहां वर्ष 2000 से बनी हुई थी। ऐसे में प्रशासन ने 2.22 करोड़ जुर्माना भी लगाया। शनिवार को यहां प्रशासनिक टीम ने फैसला पढ़कर सुनाया और सोमवार को ध्वस्तीकरण कर दिया। बेगमाबाद मिश्रित आबादी वाला इलाका है। जिस जगह मस्जिद है, उसके आसपास मुस्लिम परिवार व दुकानें थी। ऐसे में ध्वस्तीकरण के दौरान मामले की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस सक्रिय रही। सोमवार सुबह से ही यहां एक कंपनी पीएसी व आरएएफ को तैनात कर दिया गया। मोदीनगर के अलावा मुरादनगर, भोजपुर व निवाड़ी थाने से बल यहां बुलाया गया। डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी, एसडीएम मोदीनगर अजित कुमार सिंह ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान मौके पर डटे रहे। ध्वस्तीकरण का कार्य दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ। चार जेसीबी बुलडोजर की मदद से अलग-अलग हिस्से को ध्वस्तीकरण कार्य शुरू किया गया। अधिकांश दुकानें तोड़ने के बाद मस्जिद का गेट ध्वस्त किया गया। मस्जिद का गेट तोड़ने की बात प्रशासन ने दबा रखी थी। पहले केवल दुकानों के ध्वस्तीकरण की ही सूचना दी थी। शाम करीब पांच बजे तक ध्वस्तीकरण चला।
-मस्जिद समिति वसूलती थी किराया
मस्जिद समिति का पूरी कांप्लेक्स पर होल्ड था। उनके द्वारा दुकानों को पांच से दस हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर दिया जाता था। इतना ही नहीं, एक व्यक्ति से दूसरे के नाम दुकान को करने के एवज में चार से पांच लाख रुपये लिये जाते थे। सरकारी जमीन पर दुकानें बनाकर मस्जिद समिति मोटी कमाई कर रही थी।
-कस्बा पुलिस चौकी बनाए जाने की चर्चा
चर्चा है कि इस जमीन पर जल्द कस्बा पुलिस चौकी का निर्माण कार्य शुरू होगा। दिल्ली-मेरठ मार्ग पर बनी अस्थाई पुलिस चौकी को हटाया गया। इस स्थान पर चौकी होने से पुलिस आबादी के बीच से निगरानी रख सकेगी। इसको लेकर डीसीपी ग्रामीण, एसडीएम व एसीपी की मौके पर चर्चा भी हुई।
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--डासना में अवैध मदरसे पर चला बुलडोजर, 25 करोड़ की सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से हुआ था निर्माण
तहसीलदार सदर की कोर्ट से बेदखली के आदेश के बाद डासना के कल्लू गढ़ी में बने अवैध मदरसे पर बुधवार को जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलवा दिया। यह मदरसा ग्राम समाज की सरकारी भूमि पर बनाया गया था, वर्तमान में जमीन की कीमत लगभग 25 करोड़ है। सरकारी जमीन पर अवैध रूप से मदरसा बनाए जाने पर कोर्ट ने 1.23 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था, यह धनराशि भी अब तक जमा नहीं की गई है।
इस मामले में मदरसे का निर्माण कराने में मुख्य भूमिका में रहने वाले दिल्ली के फारूक के खिलाफ मसूरी थाने में एफआइआर भी दर्ज कराई जा रही है। इसके अलावा सरकारी जमीन पर अवैध मदरसा किस तरह से बन गया, उस वक्त अधिकारियों ने निर्माण कार्य क्यों नहीं रुकवाया, इसको लेकर जिलाधिकारी ने जांच भी शुरू कराई है। जिससे कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके। तहसीलदार सदर रितेश सिंह ने बताया कि डासना के कल्लूगढ़ी में खसरा संख्या 1548ख में लगभग पांच हैक्टेयर जमीन ऊसर के नाम दर्ज है, जो कि सरकारी भूमि है। इसमें से एक हैक्टेयर जमीन पर अवैध रूप से मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम का निर्माण और पार्क बनाकर अतिक्रमण किया गया था। इस संबंध में स्थानीय लेखपाल संजीव ने 24 जनवरी 2023 को तहसीलदार न्यायिक की कोर्ट में वाद दायर कर रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि जमीन पर वर्ष 2021 से अतिक्रमण किया गया था, इसके बाद तहसीलदार न्यायिक की कोर्ट से मदरसा जामिया अरबिया इशातुल को अपना पक्ष देने के लिए नोटिस जारी किया गया लेकिन उनकी ओर से पैरवी नहीं की गई तो कोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को बेदखली का आदेश जारी कर दिया और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने की एवज में मदरसा जामिया अरबिया इशातुल पर 1.23 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। मदरसे का निर्माण कराने में दिल्ली में रहने वाले फारूक नामक व्यक्ति की अहम भूमिका सामने आई है, उससे जुर्माने की धनराशि वसूलने का प्रयास किया गया लेकिन प्रशासन को सफलता नहीं मिल पाई। इसके बाद मदरसे को तोड़कर जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए पुलिस बल की मांग की गई।
--मुख्यमंत्री ने रकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिए
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिए हैं। तहसीलदार न्यायिक की कोर्ट से सरकारी जमीन पर बने मदरसे को बेदखल करने का आदेश जारी हो चुका था, बुधवार को पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मिलने पर अवैध निर्माण कर बनाए गए मदरसे पर बुलडोजर चलाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। शांतिपूर्ण तरीके से कार्रवाई की गई, कार्रवाई में किसी प्रकार का अवरोध न हो, इसके लिए पुलिस की टीम सतर्क रही। इसके अलावा जिले में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किए गए अवैध निर्माण को भी चिह्नित करने के निर्देश तीनों तहसील प्रशासन को दिए गए हैं। जहां पर सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किया गया है, उसमें न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए जमीन को कब्जा मुक्त कराया जाएगा। बुधवार को अवैध निर्माण पर की गई कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल, आरआरएफ, डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी, एडीएम एलए अवनीश सिंह सहित अन्य अधिकारियों की उपस्थिति रही।
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खोड़ा में दो, लोनी और कनावनी में एक-एक मदरसा सील
गाजियाबाद के खोड़ा में सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद प्रशासन ने अवैध निर्माण और बिना मान्यता चल रहे मदरसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी अभियान के तहत कनावनी और लोनी में दो मदरसों को सील किया गया, जहां न तो जरूरी दस्तावेज थे और न ही फायर व बिजली से जुड़ी एनओसी ली गई थी। खोड़ा में बकरीद के दिन हुए 17 वर्षीय सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इस मामले के सामने आने के बाद अवैध निर्माण और बिना मान्यता चल रहे संस्थानों पर प्रशासन का फोकस बढ़ गया है। इसी कड़ी में शनिवार को कनावनी और लोनी क्षेत्र में संचालित दो अवैध मदरसों को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और पहले मदरसों को खाली कराया गया, उसके बाद सीलिंग की प्रक्रिया पूरी की गई। जांच में सामने आया कि इन मदरसों के पास न तो वैध मान्यता थी और न ही आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे। अग्निशमन विभाग और बिजली सुरक्षा से जुड़ी एनओसी भी नहीं ली गई थी। इतना ही नहीं, एक मदरसे में बिजली चोरी का मामला भी सामने आया, जहां कटिया डालकर अवैध रूप से बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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--बागपत में मदरसे पर चला बुलडोजर, मस्जिद भी जमींदोज
बागपत जिले में अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खेत की जमीन पर बने एक मदरसे और मस्जिद को बुल्डोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देश पर बुधवार को राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम ने बोपुरा गांव में पहुंचकर अवैध रूप से निर्मित ढांचे को हटाया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। राजस्व अभिलेखों के अनुसार, मुजफ्फरनगर जिले की बुढ़ाना तहसील के कसेरवा गांव निवासी सोकिन पुत्र रहीसुद्दीन ने वर्ष 2023 में बोपुरा गांव में कृषि भूमि खरीदी थी। प्रशासन का आरोप है कि भूमि का उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज चेंज) कराए बिना और संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना वहां मदरसा इस्लामिया सबलूल फलाह संचालित किया जाने लगा। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि बाद में उसी परिसर में एक पक्की मस्जिद का निर्माण भी कराया गया था। स्थानीय प्रशासन को खेत की जमीन पर धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायत मिली थी। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच कराई गई। राजस्व विभाग द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट में निर्माण को नियमों के विपरीत बताया गया। प्रशासन के अनुसार, जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी, जिसके बाद संबंधित निर्माण को हटाने के आदेश जारी किए गए। शासन के निर्देशों के अनुपालन में तहसीलदार श्वेताभ सिंह, नायब तहसीलदार विनोद कुमार और प्रदीप कुमार राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जेसीबी मशीनों की मदद से मदरसे और मस्जिद के पक्के ढांचे को ध्वस्त करा दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और पुलिस बल को तैनात किया गया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। नायब तहसीलदार विनोद कुमार ने बताया कि कृषि भूमि पर बिना विभागीय अनुमति के पक्का निर्माण किया गया था, जो नियमों के विरुद्ध था। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशों और विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि जिले में अवैध निर्माण और भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। ध्वस्तीकरण के दौरान राजस्व निरीक्षक जितेंद्र गुप्ता, लेखपाल सचिन कुमार, धर्मेंद्र कुमार तथा दोघट थानाध्यक्ष केवल सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे।
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--संभल में अवैध मस्जिद पर चला बुलडोजर, पाकिस्तानी झंडा मिलने से हड़कंप
तहसील क्षेत्र के गांव कसेरुआ में सरकारी भूमि पर बने मुस्तफा कादरी मस्जिद के ढांचे को रविवार को दूसरे दिन भी ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी रही। शनिवार को मस्जिद के अग्रभाग, पिलर और 55 फीट ऊंची मीनार गिराए जाने के बाद शेष हिस्से को भी बुलडोजर से ढहा दिया गया। भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में शाम तक पूरी मस्जिद को जमींदोज कर दिया गया। प्रशासन ने मस्जिद प्रबंधक पर एक लाख 12 हजार 800 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। गांव कसेरुआ में गाटा संख्या 409 कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है, लेकिन इस भूमि पर एक मस्जिद और तीन मकान बने हुए थे। इसके अलावा गाटा संख्या 410, जो खाद के गड्ढे की भूमि है, उस पर करीब 600 वर्गमीटर क्षेत्र में आठ मकान बने हुए हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर जिलाधिकारी के निर्देश पर इस भूमि की जांच कराई गई थी। जांच में स्पष्ट हुआ था कि 409 कब्रिस्तान की करीब 1200 वर्ग मीटर भूमि में से 120 वर्ग मीटर भूमि पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। इस पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत कार्रवाई करते हुए बेदखली का आदेश पारित किया गया था। कहा कि मस्जिद कमेटी की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। शनिवार को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल, एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई के साथ एसडीएम सहित राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। प्रशासन ने बुलडोजर और हाइड्रा मशीन की मदद से मस्जिद के आगे हिस्से तथा पिलर सहित 55 फीट ऊंची मीनार को खींचकर ध्वस्त कराया था। इसके बाद रविवार को बची हुई दीवारों और अन्य निर्माण को हटाने का कार्य किया गया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम रहे। मौके पर पांच थानों की पुलिस के अलावा लगभग 60 पीएसी जवान तैनात रहे। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई, जिससे विरोध उत्पन्न न हो। ध्वस्तीकरण कार्य के दौरान आसपास के लोगों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि शाम तक मस्जिद के पूरे ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मस्जिद प्रबंधक जाकिर हुसैन पर एक लाख 12 हजार 800 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बताया कि सरकारी भूमि पर मस्जिद के रूप में कब्जा इन्हीं के माध्यम से किया गया था। राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि सरकारी और कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी सावधानी के साथ की गई।मस्जिद के आसपास घनी आबादी होने के कारण मशीनों का संचालन बेहद सतर्कता से कराया गया, जिससे किसी आवासीय भवन को नुकसान न पहुंचे। इसी वजह से कार्रवाई को दो दिनों में पूरा किया गया। तहसीलदार ने बताया कि शासन की मंशा स्पष्ट है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संभल में भी शासन के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जा रही है। सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए भवनों और कब्जों को चिह्नित किया जा रहा है।
-मस्जिद में मिला पाकिस्तानी झंडा, आठ पर मुकदमा
नखासा थाना क्षेत्र के गांव कसेरुआ में शनिवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान मुस्तफा कादरी मस्जिद परिसर से मिले पोस्टरों और एक झंडे को लेकर पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। बताते हैं कि बरामद सामग्री के माध्यम से सांप्रदायिक माहौल प्रभावित करने और समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया।
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई को मस्जिद के अंदर से 49 पोस्टर मिले थे, जिन पर आई लव मोहम्मद लिखा हुआ था। इसके अलावा एक झंडा भी मिला, जिस पर अर्धचंद्र और सितारे का निशान बना हुआ था। यह झंडा पाकिस्तानी झंडे जैसा प्रतीत हो रहा है। इसके बाद थाना नखासा पुलिस ने बीएनएस की धारा 353(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
उपनिरीक्षक अरुण कुमार की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कहा गया है कि बरामद सामग्री के माध्यम से समाज में वैमनस्यता फैलाने तथा सांप्रदायिक सौहार्द्र को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने सभी पोस्टर और झंडे को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मामले में मुतव्वली जाकिर, जाकिर हुसैन, तस्लीम, भूरे अली, शरफद्दीन, दिल शरीफ, मोहब्बत अली और नन्हें के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सभी आरोपित गांव कसेरुआ के निवासी हैं। मालूम हो कि जाकिर हुसैन, तस्लीम, भूरे, शरफद्दीन, दिल शरीफ, मोहम्मद अली और नन्हें के खिलाफ 18 जनवरी 2026 को लेखपाल खाबर हुसैन की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में मस्जिद को धोखाधड़ी कर सुन्नी वक्फ बोर्ड में दर्ज कराने का आरोप लगाया गया था।
--संभल में बुलडोजर एक्शन पर भड़के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क
संभल में मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन के बाद राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क भड़क गए हैं। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है। सपा नेता ने कहा कि अब बहुत हो गया, हम लोग अब अपने मस्जिद और मदरसे पर कारवाई नहीं होनें देगें। हम लोग संवैधानिक तौर से लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा कि जुल्म की इंतेहा हो गई। लाख कोशिशों, गुज़ारिशों और कानूनी प्रयासों के बावजूद सम्भल प्रशासन द्वारा कसेरवा गांव में मस्जिद को शहीद कर दिया गया। ऐसा महसूस होता है अधिकारियों द्वारा आंखों पर पट्टी बांधकर एक तय निशाने के साथ कार्रवाई की जा रही है। सपा सांसद ने कहा कि हमारी मजहबी आजादी को छीना जा रहा है। ऐसा करने का किसी सरकार को अधिकार नहीं है। अब हम लोग अपने धार्मिक स्थल पर हमला नहीं होने देगें। प्री प्लानिंग के तहत मस्जिद पर कारवाई की गयी है। गांव के लोगों को बिना बताये कार्रवाई की गयी है। जियाउर्रहमान बर्क ने आगे कहा कि अधिकारियों ने अपनी सीमा रेखा के बाहर जाकर काम किया है। हम लोगों से अपील करते हैं कि संवैधानिक तरीके से आप लोग लड़ाई कीजिये, हम लोग कोर्ट जायेगें। रात में फैसला करके दिन में बुलडोजर की कार्रवाई की जा रही है।