-हिन्दू पर अत्याचार करने वाले जिहादियों के नाश का प्रस्ताव
-मोहम्मद, कुरान और इस्लाम को शत्रु न मानने वालों को बहिष्कार
-जिहादियों के शिकार हिन्दू परिवारों की हर प्रकार से होगी सहायता
-शिव शक्ति धाम डासना में हुई हिन्दू महापंचायत में जिहादी नाश का आह्वान
सूर्या बुलेटिन
गाजियाबाद। शिव शक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर और श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज के आह्वान पर आयोजित हुई हिन्दू महापंचायत में जिहादियों के नाश के लिए आठ प्रस्तावों को सहमति दी गई। इन प्रस्तावों के अनुसार कोई भी जिहादी अब बच नहीं सकेगा। पंचायत में हिंदुओं ने विशेष रूप से नारी शक्ति और युवाओं ने जातिवाद को पीछे धकेल कर बड़ी मात्रा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। डासना हिन्दू पंचायत में 8 प्रस्ताव पारित किए गए जो सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया के हर हिन्दू को भेजे जाएंगे और पत्र के माध्यम से सभी मुख्य हिन्दू धर्मगुरुओं को भेजे जायेंगे।
-पहला प्रस्ताव
मोहम्मद के समय से आज तक जितने भी निर्दोष हिंदुओं तथा अन्य धार्मिक विश्वास वाले मानवों का नरसंहार कुरान के आदेश पर इस्लाम के अनुसार हुई है, उन सब का दोषी मोहम्मद, कुरान और इस्लाम पर है। अतः यह पंचायत इन तीनों को सनातन धर्म और मानवता का सबसे बड़ा शत्रु घोषित करती है।
--दूसरा प्रस्ताव
हिन्दू पंचायत ने दूसरा प्रस्ताव सर्वसम्मति से यह पारित किया कि सम्पूर्ण विश्व में जो भी व्यक्ति मोहम्मद, कुरान और इस्लाम को अपना शत्रु नहीं मानता और मुसलमानों से मित्रता रखता है,वो कभी भी सनातन धर्म के मानने वालो का और सभी गैर मुस्लिमों का हितैषी नहीं हो सकता। ऐसा व्यक्ति जो मोहम्मद, कुरान और इस्लाम को अपना शत्रु नहीं समझता,वह हमारा शत्रु है।
--तीसरा प्रस्ताव
सर्वसम्मति से पारित तीसरा प्रस्ताव, जो भी हिन्दू अपने बेटो या अन्य परिजनों की इस्लाम के जिहादियों द्वारा हत्या किए जाने पर प्रतिशोध लेने के स्थान पर सरकार से मुआवजा और नौकरी मांगने लगता है,उसका हिन्दू समाज बहिष्कार करेगा। जो हिन्दू परिवार अपने बेटो या परिजनों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करेगा, हिन्दू समाज हर तरह से उसका साथ देगा।
--चौथा प्रस्ताव
महापंचायत में चौथा प्रस्ताव यह पारित किया गया कि मुसलमानों का हर तरह से सामाजिक,आर्थिक बहिष्कार एक हिन्दू का धार्मिक कर्तव्य है। जो हिन्दू मुसलमानों का पूर्ण बहिष्कार नहीं करता,वह अपने परिवार और संतान सहित अपने कुल,वंश और धर्म का गद्दार है।आज मुसलमान चाहे किसी भी रूप में हो,वो जिहाद कर रहा है अर्थात वो हर तरह से गैर मुस्लिमों को खत्म करने का सुनियोजित प्रयास कर रहा है। मुसलमान चाहे चिकित्सक हो,न्यायाधीश हो, प्रशासनिक अधिकारी हो, अध्यापक हो, नेता हो, दुकानदार हो, जिम में ट्रेनर हो, भिखारी ही क्यों न हो, वो अपनी पूरी शक्ति जिहाद में लगा रहा है। ऐसे में इनसे किसी भी तरह का व्यवहार करना अपने सर्वनाश को बुलावा देना है।ऐसा करने वाला प्रत्येक व्यक्ति गद्दार है।
--पांचवा प्रस्ताव
1947 में धर्म के आधार पर देश का बंटवारा हुआ था। जिसमें मुसलमानों को दो देश पाकिस्तान और बांग्लादेश मिले और हिंदुओं के हिस्से में आए भारत को हिंदुओं के गद्दार नेताओं ने इस्लाम के जिहादियों का सबसे बड़ा शिकारगाह बना दिया। अब हिंदुओं को बड़ी भारी कीमत चुका कर अपने गद्दार नेताओं के कुकर्मों को झेलना पड़ेगा। इससे पहले कि सारा देश इस्लाम के खूनी पंजों में पूरी तरह से गर्क होकर हमारे और हमारे बच्चों का कब्रिस्तान बन जाए, उससे पहले एक और विभाजन हमेें कर लेना चाहिए। अब मुसलमानों और उन सभी को जो मुस्लिम प्रेमी हैं और उनके साथ रहना चाहते हैं, उन सबको उनकी आबादी के अनुपात में एक देश दे दिया जाना चाहिए और जो बाकी बचे हुए हिंदुओं के लिए एक ऐसा देश बनाना चाहिए जहां एक भी मुसलमान, मस्जिद और कुरान न हो।
--छठा प्रस्ताव
जब तक देश का दोबारा बंटवारा नहीं होता तब तक हिंदुओं को अपनी बस्तियां मुसलमानों से अलग बनानी चाहिए। हिंदुओं को अपनी बस्तियों में किसी भी मुसलमान को किसी भी परिस्थिति में घुसने नहीं देना चाहिए। डासना हिन्दू पंचायत ने सातवां प्रस्ताव यह पारित किया कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने हो लव जिहाद करने वाले की हत्या का धर्मादेश दिया है, उसका हर हिन्दू को समर्थन करना चाहिए। अब लव जिहाद से निपटने का एकमात्र यही तरीका है।
--सातवां प्रस्ताव
मुसलमानों के साथ कोई व्यापार करने वाले, उन्हें किराए पर कोई मकान, दुकान या जमीन देने वाले सनातन धर्म और अपने परिवार के गद्दार हैं। ऐसे लोगों का हर हिन्दू को पूर्ण बहिष्कार करना चाहिए।
--आठवां प्रस्ताव
हिंदुओं के अधिकतर संगठन हिंदुओं की रक्षा की बात करते हुए केवल राजनीतिक दलों या नेताओं की चमचागिरी में लगे हुए हैं। ऐसे संगठन केवल झूठी हवाबाजी करके हिन्दू समाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हिंदुओं को केवल उन संगठनों को अपना संगठन मानना चाहिए जो एक खून का बदला सभी दोषियों के खून से ले सके। हिन्दू पंचायत में यह भी तय किया गया कि जो हमारे इन आठ प्रस्तावों को मानेगा, केवल वो ही हमारा है। जो हमारी बात नहीं मानता,वो हमारे लिए कोई मायने नहीं रखता।